XI UNIT–2 TOURISM: A HISTORICAL ACCOUNT (HINDI)

 

2.0 पर्यटन का परिचय एवं इतिहास (Introduction to Tourism History)

आधुनिक पर्यटन (Modern Tourism) पहले के समय की यात्रा की तुलना में अधिक संगठित (Organized), योजनाबद्ध (Planned) और व्यवस्थित (Structured) है। प्राचीन समय में लोग बिना किसी निश्चित योजना के यात्रा करते थे, जबकि आज पर्यटन में परिवहन, आवास, यात्रा एजेंसियाँ, टूर पैकेज और अन्य सुविधाएँ सुव्यवस्थित रूप से उपलब्ध हैं।

विलियम एफ. थियोबाल्ड (William F. Theobald) के अनुसार:

"आज जिस रूप में हम पर्यटन को जानते हैं, वह मुख्य रूप से 20वीं शताब्दी की देन है।"

अर्थात आधुनिक पर्यटन का वास्तविक विकास 20वीं शताब्दी में बेहतर परिवहन, संचार और पर्यटन सुविधाओं के कारण हुआ।

प्राचीन समय में यात्रा के मुख्य उद्देश्य

प्राचीन काल में लोग मुख्य रूप से निम्न कारणों से यात्रा करते थे—

  • भोजन (Food) की खोज

  • आश्रय (Shelter) प्राप्त करना

  • सुरक्षा (Safety and Security) की तलाश

हालाँकि यात्रा प्राचीन समय से होती रही है, लेकिन "पर्यटन (Tourism)" शब्द का प्रयोग संभवतः 19वीं शताब्दी में शुरू हुआ।

पर्यटन का इतिहास पढ़ना क्यों आवश्यक है?

वर्तमान पर्यटन, अतीत में हुए निरंतर विकास का परिणाम है। इसलिए पर्यटन के इतिहास का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है।

इसके प्रमुख कारण हैं—

  • पर्यटन के विकास में सहायक कारकों (जैसे परिवहन और व्यापार) को समझना।

  • पर्यटन के विकास में आने वाली बाधाओं (जैसे युद्ध और असुरक्षा) की पहचान करना।

  • अतीत की गलतियों से सीख लेकर भविष्य की बेहतर योजना बनाना।

  • पुराने और वर्तमान पर्यटन की तुलना करना।

  • पर्यटन के विकास की मूल अवधारणाओं को समझना।

पर्यटन के विकास को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक

पर्यटन के विकास में कई महत्वपूर्ण कारकों का योगदान रहा है, जैसे—

  • औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution)

  • स्टीम इंजन (Steam Engine) का आविष्कार

  • ट्रांस-अटलांटिक उड़ानों (Transatlantic Flights) की शुरुआत

  • व्यापार और वाणिज्य का विस्तार

  • नई जगहों और संस्कृतियों को जानने की मानव की जिज्ञासा

उदाहरण : औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution)

औद्योगिक क्रांति ने आधुनिक पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके प्रमुख प्रभाव—

  • रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए।

  • लोगों की आय और अवकाश (Leisure Time) में वृद्धि हुई।

  • परिवहन एवं आधारभूत संरचना (Infrastructure) का विकास हुआ।

  • आधुनिक पर्यटन उद्योग के विस्तार को गति मिली।

पर्यटन के इतिहास की सीमाएँ (Limitations of Tourism History)

  • अधिकांश ऐतिहासिक विवरण यूरोप-केंद्रित (Europe-centric) हैं।

  • ये विश्व के सभी क्षेत्रों के पर्यटन विकास को समान रूप से प्रस्तुत नहीं करते।

  • फिर भी, पर्यटन के इतिहास को समझाने के लिए भारत और यूरोप के पर्यटन विकास की तुलना भी की जाती है।

2.1 प्रारम्भिक काल में यात्रा (Travel in Early Times)

पर्यटन की शुरुआत कब हुई, इसका सटीक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। प्रारम्भिक समय में लोग मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि अपनी आवश्यकताओं और विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए यात्रा करते थे।

प्रारम्भिक समय में यात्रा के मुख्य उद्देश्य

प्राचीन काल में लोग मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से यात्रा करते थे—

  • व्यापार एवं वाणिज्य (Trade and Commerce)

  • नई भूमि की खोज (Exploration of New Lands)

  • सैन्य गतिविधियाँ (Military Activities)

  • धर्म का प्रचार-प्रसार (Spread of Religion)

पर्यटन के इतिहास के प्रमुख स्रोत

पर्यटन के इतिहास की जानकारी मुख्य रूप से निम्न स्रोतों से प्राप्त होती है—

  • लिखित ऐतिहासिक अभिलेख (Written Records)

  • प्रसिद्ध यात्रियों के यात्रा-वृत्तांत (Travelogues)

प्राचीन यात्रा के प्रमाण विभिन्न देशों के बीच व्यापार तथा समुद्री यात्राओं से भी मिलते हैं।

प्रारम्भिक सभ्यताएँ और पर्यटन

कुछ प्रमुख सभ्यताओं ने यात्रा और पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया—

  • मिस्र (Egyptian)

  • यूनान (Greek)

  • रोमन (Roman)

  • सुमेरियन (Sumerian)

उदाहरण : मिस्र (Egypt)

लगभग 5000 वर्ष पहले मिस्र की रानी हत्शेपसुत (Queen Hatshepsut) ने पंट (Land of Punt - पूर्वी अफ्रीका) की यात्रा की थी।

इस यात्रा के प्रमाण लक्सर (Luxor) स्थित डीर-एल-बहरी मंदिर (Deir el-Bahri Temple) में मिले हैं।

इसके अतिरिक्त, नील नदी (River Nile) पर धनी लोगों के लिए नौका यात्राएँ आयोजित की जाती थीं, जिन्हें अवकाश पर्यटन (Leisure Tourism) का प्रारम्भिक रूप माना जाता है।

यूनान और रोम में पर्यटन

यूनान और रोम के समृद्ध लोग मनोरंजन और विश्राम के उद्देश्य से यात्रा करते थे।

उनके लिए यात्रा आसान होने के प्रमुख कारण थे—

  • भूमध्यसागरीय क्षेत्र में सामान्य भाषा (ग्रीक भाषा) का प्रयोग।

  • व्यापार के लिए सामान्य मुद्रा (Common Currency)

  • रोमन साम्राज्य का विकसित सड़क नेटवर्क

  • यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली मजबूत कानूनी व्यवस्था

प्राचीन समय में यात्रा की स्थिति

प्राचीन काल में यात्रा करना आसान नहीं था।

  • यात्रा मुख्य रूप से धनी लोगों तक सीमित थी।

  • यात्री अपने साथ भोजन, सेवक और आवश्यक सामान लेकर चलते थे।

  • उस समय होटल, आधुनिक परिवहन और विलासितापूर्ण सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं।

प्राचीन काल में पर्यटन के विकास के प्रमुख कारक

पर्यटन के विकास में निम्नलिखित कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही—

  • लोगों के पास अतिरिक्त आय (Disposable Income) होना।

  • अच्छी सड़क, नदी एवं समुद्री संपर्क व्यवस्था

  • संचार के लिए सामान्य भाषा

  • सुरक्षा एवं प्रभावी कानूनी व्यवस्था

सिल्क रूट (Silk Route / Silk Road)

सिल्क रूट को "मानव इतिहास का सबसे महान व्यापारिक मार्ग" कहा जाता है।

यह एक विशाल मार्ग-तंत्र था, जो निम्न क्षेत्रों को जोड़ता था—

  • पूर्वी एशिया (East Asia)

  • दक्षिण एशिया (South Asia)

  • पश्चिमी एशिया (West Asia)

  • यूरोप (Europe)

  • उत्तरी अफ्रीका (North Africa)

इस मार्ग का नाम चीन के रेशम (Silk) के व्यापार के कारण पड़ा। इसी मार्ग से भारत के मसालों (Spices) का निर्यात भी पश्चिमी देशों तक होता था।

सिल्क रूट का ऐतिहासिक महत्व

  • इसकी स्थापना लगभग 200 ईसा पूर्व (200 BC) हुई।

  • इसने चीन, भारत, फारस (Persia) और रोम (Rome) जैसे महान साम्राज्यों को जोड़ा।

  • यह पूर्व और पश्चिम के बीच पहला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग बना।

पर्यटन की दृष्टि से सिल्क रूट का महत्व

सिल्क रूट पर यात्रियों और व्यापारियों की सुविधा के लिए—

  • व्यापारिक केंद्र (Trading Posts) बनाए गए।

  • कारवाँ सराय (Caravanserai) अर्थात विश्राम स्थल विकसित किए गए।

इसी कारण इसे व्यावसायिक पर्यटन (Business Tourism) का प्रारम्भिक रूप भी माना जाता है।

सिल्क रूट से जुड़े प्रसिद्ध यात्री

  • सिकन्दर महान (Alexander the Great)

  • मार्को पोलो (Marco Polo)

सिल्क रूट की संरचना

  • यह एक अकेला मार्ग नहीं, बल्कि अनेक मार्गों का विशाल नेटवर्क था।

  • इसकी कुल लंबाई लगभग 12,000 किलोमीटर थी।

  • व्यापारी पूरे मार्ग की यात्रा स्वयं नहीं करते थे।

  • वस्तुओं का आदान-प्रदान चरणबद्ध (Hand-over System) के माध्यम से किया जाता था।

आधुनिक समय में सिल्क रूट

वर्ष 2010 में UNWTO ने Silk Road Action Plan शुरू किया।

इसके अंतर्गत—

  • 24 देशों ने भाग लिया।

  • उद्देश्य था सिल्क रूट के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देना।

सिल्क रूट से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

  • "Silk Road" नाम फर्डिनेंड वॉन रिखथोफेन (Ferdinand von Richthofen) ने 1870 में दिया।

  • प्राचीन समय में रेशम (Silk) का उपयोग मुद्रा (Currency) के रूप में भी किया जाता था।

  • इस मार्ग ने विभिन्न देशों के बीच संस्कृति, व्यापार और ज्ञान के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मध्यकाल में पर्यटन (Tourism in the Middle Ages)

मध्यकाल में यूरोप में पर्यटन का विकास काफी धीमा हो गया।

इसका मुख्य कारण था—

  • रोमन साम्राज्य का पतन (Fall of Roman Empire)

  • कानूनी व्यवस्था का कमजोर होना।

  • सड़क संपर्क का खराब होना।

  • यात्रा मार्गों का असुरक्षित होना।

इसी कारण इस काल को अंधकार युग (Dark Ages) कहा जाता है।

अपवाद : धार्मिक पर्यटन (Pilgrimage Tourism)

यद्यपि सामान्य पर्यटन में गिरावट आई, फिर भी धार्मिक यात्राओं (Pilgrimage Tourism) में वृद्धि हुई।

लोग आध्यात्मिक शांति और धार्मिक आस्था के कारण विभिन्न पवित्र स्थलों (Holy Places) की यात्रा करने लगे।

2.3 पुनर्जागरण (Renaissance) और ग्रैंड टूर (Grand Tour)

पुनर्जागरण (Renaissance) का अर्थ है "पुनर्जन्म" (Rebirth) या "नई शुरुआत" (New Beginning)। यह काल मध्य युग (Middle Ages / Dark Ages) के बाद यूरोप में आया। इस समय यूरोप, विशेषकर इंग्लैंड, में कला, साहित्य, शिक्षा और संस्कृति का पुनः विकास हुआ।

इसी अवधि में यात्रा केवल व्यापार या धार्मिक उद्देश्यों तक सीमित नहीं रही, बल्कि शिक्षा, ज्ञान और संस्कृति प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गई।

ग्रैंड टूर (Grand Tour)

ग्रैंड टूर की शुरुआत 17वीं और 18वीं शताब्दी में इंग्लैंड से हुई। यह यूरोप की एक शैक्षिक (Educational) और सांस्कृतिक यात्रा (Cultural Journey) थी।

इस यात्रा में मुख्य रूप से भाग लेते थे—

  • धनी युवा (Wealthy Young Men)

  • कुलीन वर्ग (Nobles)

  • विद्वान (Scholars)

  • राजनयिक (Diplomats)

  • व्यवसायी (Businessmen)

अधिकांश यात्री अपने साथ शिक्षक (Tutor) भी ले जाते थे, ताकि यात्रा के दौरान उचित शिक्षा और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।

ग्रैंड टूर के प्रमुख गंतव्य

  • पेरिस (Paris)

  • फ्लोरेंस (Florence)

  • रोम (Rome)

  • फ्रांस और इटली के अन्य सांस्कृतिक नगर

ग्रैंड टूर के उद्देश्य

ग्रैंड टूर के प्रमुख उद्देश्य थे—

  • कला एवं विज्ञान (Arts and Sciences) का अध्ययन करना।

  • सांस्कृतिक अनुभव (Cultural Experience) प्राप्त करना।

  • सभ्य समाज (Civilised World) को समझना।

  • युवाओं को सरकारी एवं राजनीतिक पदों के लिए तैयार करना।

  • अच्छे परिवार (Good Birth) और संपन्न वर्ग (Fortune) के लोगों को उच्च शिक्षा और अनुभव प्रदान करना।

ग्रैंड टूर का महत्व

ग्रैंड टूर पर्यटन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

इसके प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं—

  • यह फैशन (Fashion) और प्रतिष्ठा (Status Symbol) का प्रतीक बन गया।

  • समय के साथ इसका शैक्षिक उद्देश्य कम होता गया।

  • बाद में यह मनोरंजन (Leisure Travel) का रूप लेने लगा।

  • यह संगठित एवं योजनाबद्ध यात्रा (Organized and Planned Travel) का प्रारम्भिक उदाहरण था।

  • इसे आधुनिक पर्यटन (Modern Tourism) की ओर पहला महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

स्पा (Spas) एवं स्नान केंद्रों (Bath Resorts) का विकास

18वीं शताब्दी में इंग्लैंड में स्पा (Spa), स्नान केंद्र (Bath Resorts) तथा समुद्र तटीय पर्यटन स्थलों (Seaside Resorts) का तेजी से विकास हुआ।

रोमन लोगों ने पहले ही इंग्लैंड और यूरोप में सार्वजनिक स्नान की परंपरा शुरू की थी, लेकिन 18वीं शताब्दी में ये स्थान विशेष रूप से धनी एवं उच्च वर्ग के लोगों में अत्यधिक लोकप्रिय हो गए।

स्पा और स्नान केंद्र लोकप्रिय क्यों हुए?

इन स्थानों पर लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए जाते थे।

साथ ही यहाँ—

  • सामाजिक मेल-मिलाप (Social Interaction) होता था।

  • नृत्य (Dancing) आयोजित किए जाते थे।

  • सामाजिक कार्यक्रम (Social Events) होते थे।

इस प्रकार ये स्थान स्वास्थ्य पर्यटन (Health Tourism) और सामाजिक प्रतिष्ठा (Social Status) दोनों के केंद्र बन गए।

उदाहरण

बाथ (Bath), इंग्लैंड उस समय अभिजात वर्ग (Aristocrats) और धनी लोगों का अत्यंत प्रसिद्ध पर्यटन स्थल था।

लोग वहाँ जाते थे—

  • स्वास्थ्य लाभ (Health Rejuvenation) के लिए।

  • सामाजिक समारोहों (Social Gatherings) में भाग लेने के लिए।

समुद्र तटीय पर्यटन (Seaside Resorts) और चिकित्सकीय सलाह

18वीं शताब्दी में समुद्र तटीय पर्यटन (Seaside Tourism) भी लोकप्रिय होने लगा।

उस समय चिकित्सकों (Doctors) का मानना था कि समुद्री जल (Sea Water) में स्नान करने से कई बीमारियों में लाभ मिलता है, जैसे—

  • शरीर में सूजन (Body Swelling)

  • अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ

डॉक्टर लोगों को—

  • खनिज जल (Mineral Water)

  • प्राकृतिक गीजर (Natural Geysers)

  • प्राकृतिक झरनों (Natural Springs)

का उपयोग करने की भी सलाह देते थे।

इससे स्वास्थ्य एवं अवकाश पर्यटन (Health and Leisure Tourism) की मांग तेजी से बढ़ी।

स्पा एवं स्नान केंद्रों का पतन

19वीं शताब्दी की शुरुआत में स्पा और स्नान केंद्रों की लोकप्रियता धीरे-धीरे कम होने लगी।

इसके मुख्य कारण थे—

  • औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution)

  • नए पर्यटन स्थलों का विकास

  • पर्यटन के नए प्रकारों का उदय

मुख्य विचार (Main Idea)

इस काल ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब यात्रा केवल व्यापार या जीविका तक सीमित नहीं रही।

लोग अब यात्रा करने लगे—

  • शिक्षा (Education) के लिए।

  • संस्कृति (Culture) को समझने के लिए।

  • स्वास्थ्य (Health) के लिए।

  • मनोरंजन (Leisure) के लिए।

यही परिवर्तन आगे चलकर आधुनिक पर्यटन (Modern Tourism) के विकास का महत्वपूर्ण आधार बना।

महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Questions)

प्रश्न 1. सिल्क रूट (Silk Route) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर :

सिल्क रूट (Silk Route) एक प्रसिद्ध व्यापारिक मार्गों का नेटवर्क (Network of Trade Routes) था, जो पूर्वी एशिया, दक्षिण एशिया, पश्चिमी एशिया, यूरोप और उत्तरी अफ्रीका को जोड़ता था। इसे मानव इतिहास का सबसे महान व्यापारिक मार्ग माना जाता है क्योंकि इसने व्यापार, यात्रा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस मार्ग का नाम चीन के रेशम (Chinese Silk) के व्यापार के कारण पड़ा। इसके माध्यम से भारतीय मसाले (Indian Spices) तथा अन्य वस्तुओं का भी व्यापार होता था। इसकी स्थापना लगभग 200 ईसा पूर्व (200 BC) हुई और इसने चीन, भारत, फारस तथा रोम जैसे प्रमुख साम्राज्यों को जोड़ा।

सिल्क रूट कोई एक सड़क नहीं था, बल्कि लगभग 12,000 किलोमीटर लंबा मार्गों का नेटवर्क था। व्यापारी पूरी दूरी स्वयं तय नहीं करते थे, बल्कि वस्तुओं को चरणबद्ध तरीके से एक व्यापारी से दूसरे व्यापारी को सौंपते थे, जिसे हैंड-ओवर सिस्टम (Hand-over System) कहा जाता है।

इस मार्ग पर व्यापारिक केंद्र (Trading Posts) और कारवाँ सराय (Caravanserai) भी बने हुए थे, इसलिए इसे व्यावसायिक पर्यटन (Business Tourism) का प्रारम्भिक रूप भी माना जाता है।

प्रश्न 2. ग्रैंड टूर (Grand Tour) क्या है?

उत्तर :

ग्रैंड टूर (Grand Tour) 17वीं और 18वीं शताब्दी में इंग्लैंड से शुरू हुई एक शैक्षिक एवं सांस्कृतिक यात्रा (Educational and Cultural Journey) थी। इसमें मुख्य रूप से धनी युवा, कुलीन वर्ग, विद्वान, राजनयिक और व्यवसायी भाग लेते थे। अधिकांश यात्री अपने साथ शिक्षक (Tutor) भी रखते थे ताकि वे यात्रा के दौरान शिक्षा और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य कला, विज्ञान, संस्कृति और यूरोपीय सभ्यता का अध्ययन करना था। यात्री पेरिस, फ्लोरेंस और रोम जैसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक नगरों की यात्रा करते थे। यह यात्रा युवाओं को सरकारी एवं राजनीतिक पदों के लिए तैयार करने में भी सहायक थी।

बाद में ग्रैंड टूर प्रतिष्ठा का प्रतीक (Status Symbol) बन गया और धीरे-धीरे इसका शैक्षिक उद्देश्य कम होकर यह मनोरंजन यात्रा (Leisure Travel) में बदल गया। फिर भी पर्यटन के इतिहास में इसका विशेष महत्व है क्योंकि यह संगठित और योजनाबद्ध पर्यटन का प्रारम्भिक उदाहरण था तथा आधुनिक पर्यटन के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

2.4 औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) और पर्यटन

औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) पुनर्जागरण (Renaissance) के बाद शुरू हुई। इसने समाज और अर्थव्यवस्था में बड़े परिवर्तन किए, जिनका पर्यटन उद्योग पर गहरा प्रभाव पड़ा।

औद्योगिक क्रांति की शुरुआत इंग्लैंड (England) में हुई और बाद में यह यूरोप (Europe) तथा संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) तक फैल गई।

इतिहासकारों के अनुसार, आधुनिक पर्यटन (Modern Tourism) का वास्तविक विकास औद्योगिक क्रांति के दौरान और उसके बाद हुआ।

औद्योगिक क्रांति से हुए प्रमुख परिवर्तन

औद्योगिक क्रांति के कारण समाज और पर्यटन में कई महत्वपूर्ण बदलाव आए—

  • मध्यम वर्ग (Middle Class) का विकास हुआ।

  • सस्ते परिवहन (Cheaper Transport) की सुविधा उपलब्ध हुई।

  • शहरों (Cities) और शहरी क्षेत्रों (Urban Centres) का तेजी से विकास हुआ।

  • शहरों से शहरों तथा शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों के बीच यात्रा बढ़ी।

  • लोगों में अवकाश (Leisure Time) और छुट्टियों (Holidays) की अवधारणा विकसित हुई।

अवकाश (Holiday) का अर्थ

प्राचीन समय में लोग कार्य से मिलने वाले अवकाश का उपयोग मुख्य रूप से धार्मिक कार्यों (Religious Purposes) के लिए करते थे।

ऐसे दिनों को "Holy Days" कहा जाता था।

समय के साथ यही शब्द बदलकर "Holiday" बन गया।

स्टीम शक्ति (Steam Power) की भूमिका

स्टीम इंजन (Steam Engine) के आविष्कार ने पर्यटन के विकास को नई गति दी।

इसके कारण—

  • रेल यात्रा (Rail Travel) शुरू हुई।

  • स्टीम बोट (Steam Boats) का विकास हुआ।

  • स्टीम जहाज (Steam Ships) चलने लगे।

वर्ष 1830 में इंग्लैंड में पहली बार रेलवे द्वारा यात्रियों को ले जाया गया।

पहला यात्री रेल मार्ग लिवरपूल (Liverpool) और मैनचेस्टर (Manchester) के बीच शुरू हुआ।

थॉमस कुक (Thomas Cook) और संगठित पर्यटन

थॉमस कुक (Thomas Cook) को पर्यटन इतिहास का पहला संगठित टूर (Organized Tour) आयोजित करने का श्रेय दिया जाता है।

उन्होंने 5 जुलाई 1841 को लीसेस्टर (Leicester) से लफबरो (Loughborough) तक एक भ्रमण यात्रा (Excursion Trip) आयोजित की।

इस यात्रा की प्रमुख विशेषताएँ—

  • 570 यात्रियों ने भाग लिया।

  • प्रत्येक यात्री ने एक शिलिंग (One Shilling) का शुल्क दिया।

  • यात्रा चार्टर्ड ट्रेन (Chartered Train) से कराई गई।

  • यात्रा में पिकनिक लंच (Picnic Lunch) और ब्रास बैंड (Brass Band) की भी व्यवस्था थी।

थॉमस कुक का योगदान

थॉमस कुक ने पर्यटन उद्योग के विकास में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए—

  • 1843 में लगभग 3000 विद्यार्थियों के लिए लीसेस्टर से डर्बी तक यात्रा आयोजित की।

  • 1848 से 1863 के बीच स्कॉटलैंड के लिए सर्कुलर टूर (Circular Tours) शुरू किए।

  • एक ही पर्यटन सीजन में लगभग 5000 पर्यटकों ने इन यात्राओं में भाग लिया।

  • 1867 में उन्होंने—

    • पहला होटल वाउचर (Hotel Voucher) शुरू किया।

    • यात्रा व्यवसाय में विदेशी मुद्रा विनिमय (Foreign Currency Exchange) की सुविधा प्रदान की।

इन्हीं योगदानों के कारण उन्हें "पर्यटन उद्योग का जनक (Father of Tourism Industry)" कहा जाता है।

जहाजों द्वारा अवकाश पर्यटन (Leisure Travel by Ships)

औद्योगिक क्रांति के बाद जहाजों द्वारा मनोरंजन और अवकाश के लिए यात्रा भी तेजी से लोकप्रिय हुई।

विशेष रूप से ट्रांस-अटलांटिक यात्रा (Transatlantic Travel) का महत्व बढ़ा।

पहले जहाजों का उपयोग मुख्य रूप से—

  • व्यापार एवं वाणिज्य (Trade and Commerce)

  • नई भूमि की खोज (Discovery of New Lands)

  • युद्ध एवं सैन्य अभियानों (Military Wars and Battles)

के लिए किया जाता था।

ट्रांस-अटलांटिक यात्रा (Transatlantic Travel)

ट्रांस-अटलांटिक यात्रा का अर्थ है इंग्लैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच समुद्री यात्रा

यह उस समय विश्व के सबसे लंबे और सबसे अधिक लाभदायक यात्री मार्गों में से एक बन गया।

जहाज यात्रा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

  • 1818 – अमेरिका की ब्लैक बॉल लाइन (Black Ball Line) ने ट्रांस-अटलांटिक यात्री सेवा शुरू की।

  • 1839सैमुअल कुनार्ड (Samuel Cunard) ने British and North American Royal Mail Steam-Packet Company की स्थापना की, जिसे बाद में Cunard Line कहा गया।

  • 1840Cunard Line ने अटलांटिक महासागर में पहली नियमित स्टीमशिप सेवा (Scheduled Steamship Service) शुरू की।

  • 1869स्वेज नहर (Suez Canal) का उद्घाटन हुआ।

  • 1914पनामा नहर (Panama Canal) का उद्घाटन हुआ।

महासागरीय जहाजों (Ocean Liners) का विकास और पतन

समय के साथ समुद्री यात्री सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ।

  • 1902 में लगभग 2 लाख (200,000) यात्रियों ने अटलांटिक पार किया।

  • 1929 तक यह संख्या बढ़कर 10 लाख (1 Million) से अधिक हो गई।

  • द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के बाद भी लगभग 13 वर्षों तक यात्री जहाजों का व्यवसाय बढ़ता रहा।

वर्ष 1958 : एक महत्वपूर्ण मोड़

1958 में पहली बार व्यावसायिक जेट विमान (Commercial Jet Airliner) ने बिना रुके (Non-stop) अटलांटिक महासागर पार किया।

यहीं से महासागरीय यात्री जहाजों के महत्व में गिरावट शुरू हुई।

उस समय—

  • 25 कंपनियाँ (Companies)

  • 70 जहाज (Ships)

ट्रांस-अटलांटिक मार्गों पर संचालित हो रहे थे।

1959 तक लगभग 63% यात्री हवाई मार्ग (Air Travel) से यात्रा करने लगे, क्योंकि यह समुद्री यात्रा की तुलना में अधिक तेज़ (Faster) और अधिक सुरक्षित (Safer) थी।

2.5 आधुनिक काल में पर्यटन (Tourism in Modern Times)

आधुनिक पर्यटन (Modern Tourism) का विकास मुख्य रूप से द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के बाद हुआ। इस अवधि में लोगों की आय (Wages) बढ़ी, कार्य परिस्थितियों (Working Conditions) में सुधार हुआ और लोगों को अधिक अवकाश (Leisure Time) मिलने लगा। परिणामस्वरूप, लोग मनोरंजन और घूमने-फिरने के उद्देश्य से अधिक यात्रा करने लगे।

1950 के दशक में जेट विमान (Jet Aircraft) के विकास तथा वाणिज्यिक विमानन उद्योग (Commercial Airline Industry) के विस्तार ने यात्रा को—

  • तेज़ (Faster)

  • आसान (Easier)

  • सस्ती (Cheaper)

बना दिया।

इससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन (International Tourism) में तेजी से वृद्धि हुई तथा लोगों की अन्य देशों, संस्कृतियों, लोगों और परंपराओं को जानने में रुचि बढ़ी।

आधुनिक पर्यटन की प्रमुख विशेषताएँ

आज का पर्यटन कई आधुनिक सुविधाओं और परिवर्तनों से जुड़ा हुआ है, जैसे—

  • बेहतर जीवन स्तर (Improved Living Standards)

  • अधिक जीवन प्रत्याशा (Better Life Expectancy)

  • उन्नत परिवहन (Advanced Transport)

  • आधुनिक तकनीक (Modern Technology)

वर्तमान समय में पर्यटन मुख्य रूप से तीन रूपों में देखा जाता है—

  • जन पर्यटन (Mass Tourism)

  • सतत पर्यटन (Sustainable Tourism)

  • पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन (Eco-friendly Tourism)

जन पर्यटन (Mass Tourism)

जन पर्यटन में बड़ी संख्या में पर्यटक पैकेज टूर (Package Tours) के माध्यम से यात्रा करते हैं।

इसका मुख्य उद्देश्य किसी पर्यटन स्थल का भ्रमण करना और उसे अपनी यात्रा सूची (Travel List) में शामिल करना होता है।

सतत पर्यटन (Sustainable Tourism)

सतत पर्यटन वह पर्यटन है जो—

  • पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुँचाता है।

  • कम कार्बन उत्सर्जन (Small Carbon Footprint) करता है।

  • स्थानीय पर्यावरण (Local Environment) और स्थानीय समुदाय (Local Community) की रक्षा करता है।

यात्रा के साधनों में परिवर्तन

समय के साथ पर्यटन और यात्रा के साधनों में भी परिवर्तन आया है।

पहले यात्री जहाज (Passenger Ships) लंबी यात्राओं का प्रमुख साधन थे।

लेकिन वाणिज्यिक हवाई सेवाओं (Commercial Airlines) के विकास के बाद जहाजों का महत्व सामान्य यातायात के रूप में कम हो गया।

बाद में यही यात्री जहाज क्रूज़ जहाज (Cruise Ships) के रूप में विकसित हुए।

आज क्रूज़ जहाज—

  • चलते-फिरते होटल (Floating Hotels) की तरह कार्य करते हैं।

  • स्वयं एक पर्यटन आकर्षण (Floating Destination) भी होते हैं।

इनका उपयोग—

  • एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा करने के लिए।

  • स्वयं पर्यटन और मनोरंजन का आनंद लेने के लिए किया जाता है।

वैकल्पिक पर्यटन (Alternative Tourism) का महत्व

वैकल्पिक पर्यटन (Alternative Tourism) का उद्देश्य पर्यटन के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है।

यह निम्नलिखित की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है—

  • सांस्कृतिक विरासत (Heritage)

  • स्थानीय पर्यावरण (Local Environment)

  • भविष्य की पीढ़ियाँ (Future Generations)

यह जन पर्यटन (Mass Tourism) से होने वाले नुकसान को कम करने में भी सहायता करता है।

पर्यटन को समय के अनुसार बदलती आवश्यकताओं के साथ स्वयं को अनुकूलित (Adapt) करना आवश्यक है, तभी इसका निरंतर विकास संभव है।

संकटों के बावजूद पर्यटन का विकास

पर्यटन उद्योग ने समय-समय पर कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया, लेकिन हर बार सफलतापूर्वक पुनः विकास किया।

कुछ प्रमुख संकट—

  • 9/11 आतंकवादी हमला (9/11 Terror Attacks)

  • ब्रिटेन तथा अन्य देशों में बम विस्फोट (Bomb Blasts)

  • सुनामी (Tsunami)

  • वैश्विक आर्थिक मंदी (Economic Meltdown)

  • युद्ध एवं युद्ध जैसी परिस्थितियाँ (Wars and War-like Situations)

  • स्वास्थ्य संकट जैसे SARS और Avian Flu

इन सभी चुनौतियों के बाद भी पर्यटन उद्योग ने मजबूत वापसी (Strong Recovery) की।

UNWTO के अनुसार पर्यटन विकास

UNWTO World Tourism Barometer के अनुसार—

  • 2011 में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन से प्राप्त आय 1,030 अरब अमेरिकी डॉलर (US$ 1,030 Billion) रही।

  • 2010 में यह आय 928 अरब अमेरिकी डॉलर (US$ 928 Billion) थी।

  • वास्तविक रूप से पर्यटन आय में 3.8% की वृद्धि हुई।

  • 2011 में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या 4.6% बढ़ी।

  • कुल 982 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों ने यात्रा की।

  • 2012 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या 1 बिलियन (100 करोड़) से अधिक हो गई।

पर्यटन का आर्थिक महत्व

पर्यटन केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण—

  • सामाजिक गतिविधि (Social Phenomenon)

  • आर्थिक गतिविधि (Economic Activity)

भी है।

पर्यटन से—

  • रोजगार के अवसर (Employment Opportunities) बढ़ते हैं।

  • विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) अर्जित होती है।

इसी कारण अनेक देश पर्यटन को एक लाभदायक उद्योग (Profitable Industry) मानते हैं।

पर्यटन एक उद्योग के रूप में

पर्यटन एक विखंडित उद्योग (Fragmented Industry) है, क्योंकि इसमें अनेक अलग-अलग क्षेत्रों का योगदान होता है।

इनमें प्रमुख हैं—

  • होटल (Hotels)

  • मोटल (Motels)

  • आवास सुविधाएँ (Accommodation Units)

  • रेस्तराँ (Restaurants)

  • खाद्य सेवाएँ (Food Services)

  • परिवहन सेवाएँ (Transportation)

  • मनोरंजन एवं अवकाश सुविधाएँ (Amusement and Leisure Facilities)

  • उपहार दुकानें (Gift Shops)

  • तथा अन्य अनेक व्यवसाय

इसी कारण पर्यटन का विकास किसी एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं करता, बल्कि कई उद्योगों के संयुक्त योगदान से होता है।

पर्यटन का अध्ययन क्यों किया जाता है?

आज पर्यटन एक महत्वपूर्ण अध्ययन (Study) और अनुसंधान (Research) का विषय बन चुका है।

शोधकर्ता (Researchers) पर्यटकों की आवश्यकताओं का पहले से अध्ययन करते हैं ताकि—

  • उनकी जरूरतों को समझा जा सके।

  • बेहतर पर्यटन सेवाएँ प्रदान की जा सकें।

  • पर्यटकों की अपेक्षाओं को पूरा किया जा सके।

यही कारण है कि आधुनिक विश्व में पर्यटन का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है।

2.6 भारत में पर्यटन : एक परिचय (Tourism in India: An Account)

भारत में यात्रा और पर्यटन की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। भारत में यात्रा कोई नई अवधारणा नहीं थी, बल्कि प्राचीन काल से ही लोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए यात्रा करते थे। समाज के लगभग सभी वर्गों के लोग यात्रा करते थे।

प्राचीन भारत में यात्रा की अवधारणा

लगभग 3000 वर्ष पूर्व रचित ऋग्वेद के ऐतरेय ब्राह्मण (Aitareya Brahmanam) में संदेश दिया गया है—

"सूर्य के समान निरंतर चलते रहो और कभी थको मत।"

संस्कृत साहित्य में पर्यटन का संबंध "अटन (Atna/Atan)" शब्द से माना जाता है, जिसका अर्थ है—

"कुछ समय के लिए घर से बाहर जाना।"

संस्कृत में पर्यटन के तीन प्रकार

संस्कृत साहित्य में पर्यटन को तीन भागों में बाँटा गया है—

1. तीर्थाटन (Tirthatan)

धार्मिक पुण्य प्राप्त करने के लिए पवित्र स्थलों की यात्रा करना।

2. देशाटन (Deshatan)

आर्थिक लाभ या व्यापार के उद्देश्य से दूसरे देशों की यात्रा करना।

3. पर्यटन (Paryatan)

मनोरंजन, ज्ञान और अनुभव प्राप्त करने के लिए यात्रा करना।

तीर्थ पर्यटन (Pilgrimage Tourism)

तीर्थाटन भारत में पर्यटन का सबसे महत्वपूर्ण रूप माना जाता है।

भारत अनेक धर्मों और संस्कृतियों का देश है, इसलिए धार्मिक यात्राओं का विशेष महत्व रहा है।

उदाहरण

हिन्दू धर्म

  • चार धाम (Char Dham)

  • पवित्र नदियों में स्नान

बौद्ध धर्म

  • बोधगया (Bodhgaya)

  • सारनाथ (Sarnath)

  • कुशीनगर (Kushinagar)

शासकों का योगदान

भारत के अनेक राजाओं और सम्राटों ने तीर्थ यात्राओं को बढ़ावा दिया।

सम्राट अशोक (Ashoka the Great)

  • बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए व्यापक यात्राएँ कीं।

  • सड़कों के किनारे वृक्ष लगवाए।

  • यात्रियों के लिए विश्राम गृह (Rest Houses) बनवाए।

सम्राट हर्ष (Emperor Harsha)

  • अनेक संस्थानों की स्थापना की।

  • मठ (Monasteries) बनवाए।

  • यात्रियों के लिए धर्मशालाओं (Dharamshalas) का निर्माण कराया।

प्राचीन भारत में यात्रा की सुविधाएँ

अर्थशास्त्र (Arthashastra) से पता चलता है कि राज्य यात्रा सुविधाओं को अत्यधिक महत्व देता था।

यात्रा की व्यवस्था—

  • सैनिकों (Military Travellers)

  • व्यापारियों (Traders)

  • सामान्य नागरिकों (Civilians)

के लिए उपलब्ध कराई जाती थी।

व्यापार और यात्रा

प्राचीन भारत में व्यापार और वाणिज्य यात्रा का एक प्रमुख कारण था।

सिल्क रूट (Silk Route) इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, जिसके माध्यम से भारत के मसालों (Indian Spices) का व्यापार अनेक देशों में होता था।

यात्रियों के लिए सुविधाएँ

प्राचीन भारत में यात्रियों की सुविधा के लिए—

  • अच्छी सड़कों का निर्माण और रख-रखाव किया जाता था।

  • सड़कों के दोनों ओर पेड़ लगाए जाते थे।

  • मार्ग में धर्मशालाएँ और विश्राम गृह बनाए जाते थे।

मुगल काल में पर्यटन

मुगल सम्राट अपने विशाल साम्राज्य में नियमित रूप से यात्रा करते थे।

इस काल में यात्रा सुविधाएँ बेहतर हुईं क्योंकि—

  • मील के पत्थर (Milestones) लगाए गए।

  • सराय (Sarais) बनाई गईं।

  • सड़कों और मार्गों का विस्तृत नेटवर्क विकसित किया गया।

भारत आने वाले प्रमुख विदेशी यात्री

भारत अपनी समृद्ध संस्कृति, व्यापार, संपन्नता और ऐतिहासिक महत्व के कारण अनेक विदेशी यात्रियों को आकर्षित करता रहा।

प्रमुख विदेशी यात्री

हेरोडोटस (Herodotus)

  • यूनानी (Greek) यात्री।

  • Historica नामक पुस्तक लिखी।

  • सिकंदर के भारत आक्रमण का उल्लेख किया।

मेगस्थनीज (Megasthenes)

  • चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में यूनानी राजदूत।

  • मौर्यकालीन भारत के जीवन का विस्तृत वर्णन किया।

अज्ञात यात्री (Unknown Traveller)

  • Periplus of the Erythrean Sea की रचना की।

  • भारतीय समुद्री व्यापार, बंदरगाहों तथा पश्चिमी देशों से व्यापार का वर्णन किया।

फाह्यान (Fa Hien)

  • चीनी यात्री।

  • 5वीं शताब्दी ईस्वी में भारत आए।

  • भारतीय समाज, बौद्ध धर्म और राजनीतिक परिस्थितियों का वर्णन किया।

ह्वेनसांग (Yuan Chwang / Hsuan Tsang / Xuanzang)

  • प्रसिद्ध चीनी यात्री।

  • 7वीं शताब्दी ईस्वी में भारत आए।

  • लगभग 16 वर्ष भारत में रहे।

  • धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन का विस्तृत वर्णन किया।

अल-मसूदी (Al-Masudi)

  • अरब यात्री।

  • 941–943 ईस्वी के बीच भारत आए।

  • राष्ट्रकूट (Rashtrakutas) वंश का वर्णन किया।

अलबरूनी (Alberuni / Abu Rayhan)

  • प्रसिद्ध अरब विद्वान एवं यात्री।

  • महमूद गजनवी के समकालीन थे।

  • तहकीक-उल-हिन्द (Tahkik-ul-Hind) की रचना की।

  • भारत का निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ वर्णन प्रस्तुत किया।

मार्को पोलो (Marco Polo)

  • वेनिस (Venice) के प्रसिद्ध यात्री।

  • 1294 ईस्वी में दक्षिण भारत आए।

  • भारत की आर्थिक स्थिति का वर्णन किया।

इब्न बतूता (Ibn Battuta)

  • मोरक्को (Morocco) के प्रसिद्ध यात्री।

  • 1333 से 1342 ईस्वी के बीच भारत आए।

  • रिहला (Rehla) नामक यात्रा-वृत्तांत लिखा।

  • भारत के अनेक स्थानों का वर्णन किया।

राहुल सांकृत्यायन (Rahul Sankrityayan)

राहुल सांकृत्यायन को हिन्दी यात्रा साहित्य का जनक (Father of Hindi Travel Literature) कहा जाता है।

  • इन्होंने हिन्दी सहित अनेक भाषाओं में यात्रा-वृत्तांत लिखे।

  • भारत तथा विदेशों की व्यापक यात्राएँ कीं।

  • लगभग 45 वर्ष घर से बाहर रहकर यात्रा की।

  • अधिकांश यात्राएँ सड़क एवं अन्य सतही परिवहन (Surface Transport) से कीं, जिससे उनके यात्रा-वृत्तांत अत्यंत रोचक बन गए।

प्रमुख सम्मान

  • साहित्य अकादमी पुरस्कार (1958)मध्य एशिया का इतिहास

  • पद्मभूषण (1963)

आधुनिक भारत में पर्यटन

भारत में आधुनिक पर्यटन का विकास अपेक्षाकृत देर से हुआ।

इसके विकास में प्रमुख योगदान रहा—

  • रेलवे नेटवर्क (Railway Network)

  • हवाई परिवहन (Air Transport)

  • बेहतर पर्यटन अवसंरचना (Travel Infrastructure)

भारत में हवाई परिवहन का विकास

  • 1 अगस्त 1963Air Corporations Act के अंतर्गत हवाई परिवहन का राष्ट्रीयकरण किया गया।

  • 1993 – भारतीय विमानन क्षेत्र में निजी कंपनियों (Private Players) को प्रवेश की अनुमति दी गई।

पर्यटन अवसंरचना (Tourism Infrastructure)

भारत सरकार ने भारत पर्यटन विकास निगम (ITDC - India Tourism Development Corporation) की स्थापना की।

इसका उद्देश्य था—

  • आधुनिक पर्यटन सुविधाएँ उपलब्ध कराना।

  • पर्यटकों को बेहतर आराम प्रदान करना।

  • विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष सुविधाएँ विकसित करना।

भारत में घरेलू पर्यटन (Domestic Tourism)

भारत में घरेलू पर्यटन पर्यटन उद्योग की सबसे मजबूत आधारशिला है।

इसके प्रमुख कारण हैं—

  • विशाल जनसंख्या।

  • देश का बड़ा भौगोलिक क्षेत्र।

  • अनेक पर्यटन आकर्षण।

घरेलू पर्यटन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि—

विदेशी पर्यटन युद्ध, प्राकृतिक आपदा या महामारी के समय प्रभावित हो सकता है, लेकिन घरेलू पर्यटन अपेक्षाकृत जारी रहता है।

एल.टी.सी. (Leave Travel Concession - LTC)

भारत सरकार कर्मचारियों को घरेलू पर्यटन के लिए Leave Travel Concession (LTC) प्रदान करती है।

इसके अंतर्गत कर्मचारियों को निश्चित अवधि पर वेतन सहित अवकाश लेकर यात्रा करने की सुविधा मिलती है।

विदेशी पर्यटक आगमन एवं आय (2011)

भारत में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन लगातार बढ़ रहा है और भारत को विश्व स्तर पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

वर्ष 2011 के महत्वपूर्ण आँकड़े

विदेशी मुद्रा आय (Foreign Exchange Earnings - FEE)

  • US$ 16.56 Billion

  • वार्षिक वृद्धि दर 16.7%

विदेशी पर्यटक आगमन (Foreign Tourist Arrivals - FTA)

  • 6.29 Million

  • वार्षिक वृद्धि दर 8.9%

वैश्विक स्थिति

वर्ष 2011 में भारत का वैश्विक पर्यटन में हिस्सा अभी भी अपेक्षाकृत कम था।

  • भारत का स्थान 38वाँ था।

  • वैश्विक पर्यटन में भारत की हिस्सेदारी 0.64% थी।

यह दर्शाता है कि भारत में पर्यटन विकास की अभी भी अत्यधिक संभावनाएँ हैं।

2.6.1 पर्यटन परिपथ (Tourism Circuits)

पर्यटन परिपथ (Tourism Circuit) वह मार्ग होता है जिसमें कम से कम तीन प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल होते हैं।

ये पर्यटन स्थल—

  • अलग-अलग शहरों, कस्बों या गाँवों में स्थित होते हैं।

  • एक-दूसरे से बहुत अधिक दूरी पर नहीं होते।

प्रत्येक पर्यटन परिपथ में—

  • एक प्रवेश बिंदु (Entry Point)

  • एक निकास बिंदु (Exit Point)

होता है।

पर्यटन परिपथ का उद्देश्य

पर्यटक प्रवेश बिंदु से यात्रा प्रारम्भ करता है और मार्ग में स्थित सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण करता है।

इसका उद्देश्य है—

  • पर्यटकों की यात्रा अवधि और भ्रमण स्थलों की संख्या बढ़ाना।

  • मार्ग के सभी पर्यटन स्थलों का समान विकास करना।

पर्यटन परिपथ का महत्व

पर्यटन परिपथ—

  • एक ही यात्रा में अनेक स्थलों का भ्रमण आसान बनाते हैं।

  • यात्रा को अधिक योजनाबद्ध एवं आकर्षक बनाते हैं।

  • क्षेत्र के आर्थिक विकास में सहायता करते हैं।

  • पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा देते हैं।

इसलिए पर्यटन क्षेत्र के विद्यार्थियों और पेशेवरों को विभिन्न पर्यटन परिपथों की जानकारी होना आवश्यक है।

भारत के प्रमुख पर्यटन परिपथ

1. गोल्डन ट्रायंगल (Golden Triangle)

यह भारत का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन परिपथ है और विशेष रूप से विदेशी पर्यटकों में अत्यंत लोकप्रिय है।

इसमें शामिल हैं—

  • दिल्ली (Delhi)

  • आगरा (Agra)

  • जयपुर (Jaipur)

अधिकांश विदेशी पर्यटक दिल्ली से भारत में प्रवेश करते हैं, इन तीनों शहरों का भ्रमण करते हैं और पुनः दिल्ली से वापस लौट जाते हैं।

यह परिपथ उत्तर भारत के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों को जोड़ता है।

2. बौद्ध परिपथ (Buddhist Circuit)

यह परिपथ भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को जोड़ता है।

इसके प्रमुख पर्यटन स्थल हैं—

  • सारनाथ (Sarnath)

  • गया / बोधगया (Gaya / Bodhgaya)

  • कुशीनगर (Kushinagar)

यह परिपथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Questions)

प्रश्न 1. आधुनिक पर्यटन के विकास में थॉमस कुक (Thomas Cook) की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :

थॉमस कुक को "पर्यटन उद्योग का जनक (Father of Tourism Industry)" कहा जाता है क्योंकि उन्होंने आधुनिक संगठित पर्यटन (Organized Tourism) की शुरुआत की।

5 जुलाई 1841 को उन्होंने इंग्लैंड के लीसेस्टर (Leicester) से लफबरो (Loughborough) तक पहला संगठित भ्रमण आयोजित किया। इस यात्रा में 570 यात्रियों ने भाग लिया और प्रत्येक यात्री ने एक शिलिंग का शुल्क दिया। यात्रा चार्टर्ड ट्रेन से कराई गई तथा इसमें पिकनिक लंच और ब्रास बैंड की भी व्यवस्था थी।

इसके बाद उन्होंने पर्यटन के विकास में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए—

  • 1843 में लगभग 3000 विद्यार्थियों के लिए लीसेस्टर से डर्बी तक यात्रा आयोजित की।

  • 1848–1863 के बीच स्कॉटलैंड के लिए सर्कुलर टूर शुरू किए।

  • एक पर्यटन सीजन में लगभग 5000 पर्यटकों ने इन यात्राओं में भाग लिया।

  • 1867 में पहला होटल वाउचर और विदेशी मुद्रा विनिमय (Foreign Currency Exchange) की सुविधा शुरू की।

इन योगदानों के कारण पर्यटन अधिक संगठित, योजनाबद्ध और आम लोगों के लिए सुलभ बन गया।

प्रश्न 2. पर्यटन में तीर्थाटन (Pilgrimage) का क्या महत्व है?

उत्तर :

तीर्थाटन (Pilgrimage) भारत में पर्यटन का सबसे महत्वपूर्ण रूप है। संस्कृत में इसे तीर्थाटन कहा जाता है, जिसका अर्थ है धार्मिक उद्देश्य से पवित्र स्थलों की यात्रा करना।

भारत अनेक धर्मों और संस्कृतियों का देश है, इसलिए धार्मिक पर्यटन का विशेष महत्व है।

प्रमुख उदाहरण—

  • हिन्दू धर्म – चार धाम, पवित्र नदियाँ।

  • बौद्ध धर्म – बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर।

इतिहास में अनेक शासकों ने भी तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा दिया—

  • सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार किया, सड़कों के किनारे वृक्ष लगवाए तथा विश्राम गृह बनवाए।

  • सम्राट हर्ष ने धर्मशालाएँ, मठ और अन्य संस्थानों का निर्माण कराया।

तीर्थाटन के कारण—

  • यात्रा सुविधाओं का विकास हुआ।

  • सड़कें और विश्राम गृह बनाए गए।

  • सांस्कृतिक एवं धार्मिक आदान-प्रदान बढ़ा।

  • विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच संपर्क स्थापित हुआ।

इस प्रकार, तीर्थाटन प्राचीन काल से लेकर आज तक भारतीय पर्यटन का एक महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।

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